सम्मुच्छिमा हु मणुया सेढिय संखिज्ज-भाग-मित्ता हु
गब्भज-मणुया सव्वे संखिज्जा होंति णियमेण ॥151॥
अन्वयार्थ : [सम्मुच्छिा हु मणुया] सम्मूर्छन मनुष्य [सेढियसंखिज भागामिचा हु] जगतश्रेणी के असंख्यातवें भागमात्र हैं [गब्भजमणुया सव्वे] और सब गर्भज मनुष्य [णियमेण संखिज्जा होंति] नियम से संख्यात ही हैं ।

  छाबडा