
पंचक्खा चउरक्खा लद्धियपुण्णा तहेव तेयक्खा
वये क्खा वि य क मसो विससे -सहिदा हु सव्व-संखाए ॥154॥
अन्वयार्थ : [पंचक्खा चउरक्खा] पंचेन्द्रिय, चौइन्द्रिय [तहेव तेयक्खा] तेइन्द्रिय [वेयक्खा वि य] द्वीन्द्रिय [सव्व लद्धियपुण्णा] ये सब लब्ध्यपर्याप्तक जीव [संखाए विसेससहिदा] संख्या में विशेषाधिक हैं ।
छाबडा