
चउरक्खा पंचक्खा वेयक्खा तह य जाणं तेयक्खा
एदे पज्जत्ति-जुदा अहिया अहिया क मेणेव ॥155॥
अन्वयार्थ : [चउरक्खा पंचक्खा] चौइन्द्रिय, पंचेन्द्रिय [वेयक्खा तह य जाण तेयक्खा] द्वीन्द्रिय, तेइन्द्रिय, [एदे पजत्तिजुदा] ये पर्याप्ति सहित जीव [कमेणेव] अनुक्रम से [अहिया अहिया] अधिक अधिक जानो ।
छाबडा