परिवज्जिय सुहुमाणं सेस-तिरक्खाण पुण्ण-देहाणं
इक्को भागो होदि हु संखातीदा अपुण्णाणं ॥156॥
अन्वयार्थ : [सुहुमाणं परिवज्जिय] सूक्ष्म जीवों को छोड़कर [सेसतिरिक्खाण पुण्णदेहाणं] अवशेष पर्याप्ति तिर्यंच हैं [इक्को भागो होदि हु] उनका एक भाग तो पर्याप्त है [संखातीदा अपुण्णाणं] और बहुभाग असंख्याते अपर्याप्त हैं ।

  छाबडा