
सव्व-गओ जदि जीवो सव्वत्थ वि दुक्ख-सुक्ख-संपत्ती
जाइज्ज ण सा दिट्ठी णिय-तणु-माणो तदो जीवो ॥177॥
अन्वयार्थ : [जदि जीवो सव्वगओ] यदि जीव सर्वगत ही होवे तो [सव्वत्थ वि दुक्खसुक्खसंपत्ती] सब क्षेत्र-सम्बन्धी सुखदुःख की प्राप्ति इसको [जाइज] होवे [सा ण दिट्ठी] परन्तु ऐसा तो दिखाई देता नहीं है [तदो जीवो] इसलिये जीव [णियतणुमाणो] अपने शरीर प्रमाण ही है ।
छाबडा