
देह -मिलिदो वि जीवो सव्व-कम्माणि कुव्वदे जम्हा
तम्हा पवट्ट माणो एयत्तं वुज्झदे दोण्हं ॥185॥
अन्वयार्थ : [जम्हा] क्योंकि [जीवो] जीव [देहमिलिदो वि] देह से मिला हुआ ही [सव्वकम्माणि कुव्वदे] सब कार्यों को करता है [तम्हा पयट्टमाणो] इसलिए उन कार्यों में प्रवृत्ति करते हुए लोगों को [दोण्हं एय बुज्झद] दोनों के एकत्व दिखाई देता है ।
छाबडा