
देह-मिलिदो वि पिच्छदि देह-मिलिदो वि णिसुण्णदे सद्दं
देह-मिलिदो वि भुंजदि देह -मिलिदो वि गच्छेदि ॥186॥
अन्वयार्थ : [देहमिलिदो वि पिच्छदि] जीव देह से मिला हुआ ही पदार्थों को देखता है [देहमिलिदो वि णिसुण्णदे सदं] देह से मिला हुआ ही शब्दोंको सुनता है [देहमिलिदो वि भुंजदि] देह से मिला हुआ ही खाता है [देहमिलिदो वि गच्छेदि] देह से मिला हुआ ही गमन करता है ।
छाबडा