राओ हं भिच्चो हं सिट्ठी हं चेव दुब्बलो बलिओ
इदि एयत्ताविट्ठो दोण्हं भेयं ण बुज्झेदि ॥187॥
अन्वयार्थ : [एयत्ताविट्ठो] देह और जीव के एकत्व की मान्यता वाले लोग ऐसा मानते हैं कि [राओ हं] मैं राजा हूँ [भिच्चो हं] मैं भृत्य (नौकर) हूँ [सिठ्ठि हं] मैं सेठ (धनी) हूँ [चेव दुव्वलो] मैं दुर्बल हूँ, मैं दरिद्र हूँ [बलिओ] मैं बलवान हूँ [इदि] इसप्रकार से [दोण्ह भयं ण बुज्झदि] दोनों के (देह और जीव के) भेद को नहीं जानते हैं ।

  छाबडा