
जीवो वि हवइ भुत्ता कम्म-फलं सो वि भुंजदे जम्हा
कम्म-विवायं विविहं सो वि य भुंजेदि संसारे ॥189॥
अन्वयार्थ : [जम्हा] क्योंकि [जीवो वि कम्मफलं भुंजदे] जीव कर्मफल को भोगता है [सो वि भुत्ता हवइ] इसलिये भोक्ता भी यही है और [सो वि य संसारे] वह ही संसार में [विविहं कम्मविवायं भुंजेदि] कर्मों के विपाक को भोगता है ।
छाबडा