
जीवो वि हवे पावं अइ-तिव्व-कसाय-परिणदो णिच्चं
जीवो वि हवइ पुण्णं उवसम-भावेण संजुत्तो ॥190॥
अन्वयार्थ : [जीवो वि अइतिव्वकषायपरिणदो णिच्चं पावं हवइ] जब यह जीव अति तीव्र-कषाय सहित होता है, तब यह ही जीव पाप होता है और [उवसमभावेण संजुत्तो] उपशम भाव सहित होता है तब [जीवो वि पुण्णं हवेइ] यह ही जीव पुण्य होता है ।
छाबडा