+ परमात्मा -
ससीरा अरहंता केवल-णाणेण मुणिय-सयलत्था
णाण-सरीरा सिद्धा सव्वुत्तम-सुक्ख -संपत्ता ॥198॥
अन्वयार्थ : [केवलणाणेण मुणियसयलत्था] केवलज्ञान से जान लिये हैं सकल पदार्थ जिन्होंने ऐसे [ससरीरा अरहंता] शरीरसहित अरहन्त परमात्मा हैं [सव्वुत्तम सुक्खसंपत्ता] सर्वोत्तम सुख की प्राप्ति जिनको हो गई है तथा [णाणसरीरा सिद्धा] ज्ञान ही है शरीर जिनके ऐसे, (शरीर-रहित) सिद्ध परमात्मा हैं ।

  छाबडा