जं इंदिएहिं गिज्झं रूवं-रस -गंध-फास-परिणामं
तं चिय पुग्गल-दव्वं अणंत-गुणं जीव-रासीदो ॥207॥
अन्वयार्थ : [जे] जो [रूवरसगंधफासपरिणामं] रूप, रस, गंध, स्पर्श परिणाम स्वरूपसे [ इंदिएहिं गिझं ] इन्द्रियोंके ग्रहण करने योग्य हैं [तं चिय पुग्गलदव्वं ] वे सब पुद्गलद्रव्य हैं [ अणतगुणं जीवरासीदो ] वे संख्यामें जीवराशिसे अनन्तगुणे द्रव्य हैं।

  छाबडा