+ धर्म और अधर्म द्रव्य -
धम्ममधम्मं दव्वं गमण-ट्ठाणाण कारणं कमसो
जीवाण पुग्गलाणं बिण्णि वि लोगप्पमाणाणि ॥212॥
अन्वयार्थ : [जीवाण पुग्गलाणं] जीव और पुद्गल इन दोनों द्रव्यों को [गमणट्ठाणाण कारणं कमसो] गमन और अवस्थान ( ठहरना ) में सहकारी अनुक्रम से कारण [धम्ममधम्मं दव्वं] धर्म और अधर्म द्रव्य हैं [विणि वि लोगप्पमाणाणि] ये दोनों ही लोकाकाश परिमाण प्रदेशों को धारण करते हैं ।

  छाबडा