
सव्वाणं दव्वाणं अवगाहण-सत्ति अत्थि परमत्थं
जह भसम-पाणियाणं जीव-पएसाण बहुयाणं ॥214॥
अन्वयार्थ : [सव्वाणं दवाणं] सब ही द्रव्यों के परस्पर [परमत्थं] परमार्थ से [अवगाहणसत्ति अत्थि] अवगाहना देने की शक्ति है [जह भसमपाणियाणं] जैसे भस्म और जल के अवगाहन शक्ति है [जीवपएसाण जाण बहुआणं] वैसे ही जीव के असंख्यात प्रदेशों के जानना चाहिये ।
छाबडा