णिय-णिय-परिणामाणं णिय-णिय-दव्वं पि कारणं होदि
अण्णं बाहिर-दव्वं णिमित्त-मित्तं वियाणेह ॥217॥
अन्वयार्थ : [णियणियपरिणामाणं णियणियदव्वं पि कारणं होदि] सब द्रव्य अपने अपने परिणमन के उपादान कारण है [अण्णं बाहिरदव्यं] अन्य बाह्य द्रव्य हैं वे अन्य के [णिमित्तमि वियाणेह] निमित्तमात्र जानो ।

  छाबडा