कालाइ-लद्धि-जुत्ता णाण-सत्तीहि संजुदा अत्था
परिणममाणा हि सयं ण सक्केदे को वि वारेदुं ॥219॥
अन्वयार्थ : [अत्था] सब ही पदार्थ [कालाइलद्धिजत्ता] काल आदि लब्धि सहित [णाणासचीहि संजुदा] अनेक प्रकार की शक्ति सहित हैं [हि सयं परिणममाणा] स्वयं परिणमन करते हैं [को वि वारेदुं ण सक्कदे] उनको परिणमन करते हुए को कोई निवारण करने में समर्थ नहीं है ।

  छाबडा