संति अणंताणंता तीसु वि कालेसु सव्व-दव्वाणि
सव्वं पि अणेयंता तत्तो भणिदं जिणेंदेहिं ॥224॥
अन्वयार्थ : [सव्वदव्वाणि] सब द्रव्य [तीसु वि कालेसु] तीनों ही कालों में [अणंताणता] अनन्तानन्त [संति] हैं, अनन्त पर्यायों सहित हैं [तत्तो] इसलिये [जिणेंदेहिं] जिनेन्द्रदेव ने [सव्वं पि अणेयंत] सब ही वस्तुओं को अनेकान्त (अनन्त धर्मस्वरूप) [भणिदं] कहा है ।

  छाबडा