
पुव्व-परिणाम-जुत्तं कारण-भावेण वट्टदे दव्वं
उत्तर-परिणाम-जुदं तं चिय कज्जं हवे णियमा ॥230॥
अन्वयार्थ : [पुव्वपरिणामजुत्] पूर्वपरिणामयुक्त [दव्यं] द्रव्य [कारणभावेण वट्टदे] कारणभाव से वर्तता है [तं चिय] और वह ही द्रव्य [उत्तरपरिणामजुदं] उत्तर-परिणाम युक्त होवे तब [कज्जं हवे] कार्य होता है [णियमा] ऐसा नियम है ।
छाबडा