
अणु-परिमाणं तच्चं अंस-विहीणं च मण्णदे जदि हि
तो संबंध-अभावो तत्तो वि ण कज्ज-संसिद्धी ॥235॥
अन्वयार्थ : [जदि हि अंसविहीणं अणुपरिमाणं तच्चं मण्णदे] यदि एक वस्तु सर्वगत व्यापक न मानी जाय और अंश-रहित अणु-परिमाण तत्त्व माना जाय [तो संबंधाभावो ततो वि ण कज्जसंसिद्धि] तो दो अंश के तथा पूर्वोत्तर अंश के सम्बन्ध के अभाव से अणुमात्र वस्तु से कार्य की सिद्धी नहीं होती है ।
छाबडा