
जो अत्थो पडिसमयं उप्पाद-व्वय-धुवत्त-सब्भावो
गुण-पज्जय-परिणामो सो संतो भण्णदे समए ॥237॥
अन्वयार्थ : [जो अस्थो पडिसमयं उप्पादव्वधुवत्तसब्भावो] जो अर्थ समय-समय उत्पाद व्यय ध्रुवत्व के स्वभावरूप है [सो गुणपज्जयपरिणामो सत्तो समये भण्णदे] उसे गुण पर्याय परिणाम स्वरूप सत्त्व सिद्धांत में कहते हैं ।
छाबडा