
पडिसमयं परिणामो पुव्वो णस्सेदि जायदे अण्णो
वत्थु-विणासो पढमो उववादो भण्णदे बिदिरो ॥238॥
अन्वयार्थ : [परिणामो] जो वस्तु का परिणाम [पडिसमयं] समय-समय प्रति [पुव्वो णस्सेदि अण्णो जायदे] पिछला तो नष्ट होता है और अन्य उत्पन्न होता है [पढमो वत्थुविणासो] सो पहली वस्तु का तो नाश है [विदिओ उववादो भण्णदे] और दूसरी उत्पन्न हुई कहते हैं ।
छाबडा