
सो वि विणस्सदि जायदि विसेस-रूवेण सव्व-दव्वेसु
दव्व-गुण-पज्जयाणं एयत्तं वत्थु परमत्थं ॥242॥
अन्वयार्थ : [सो वि सव्वदव्वेसु विसेसरूवेण विणस्सदि जायदि] गुण भी द्रव्यों में विशेषरूप से उत्पन्न व नष्ट होता है [दव्वगुणपजयाणं एयत्तं] इस तरह से द्रव्य-गुण-पर्यायों का एकत्व है [परमत्थं वत्थु] ऐसी ही परमार्थभूत वस्तु है ।
छाबडा