
जदि दव्वे पज्जाया वि विज्जमाणा तिरोहिदा संति
ता उप्पत्ती विहला पडिपिहिद देवदत्ते व्व ॥243॥
अन्वयार्थ : [जदि दव्वे पज्जाया] जो द्रव्यों में पर्यायें हैं वे [वि विज्जमाणा तिरोहिदा संति] विद्यमान और तिरोहित ढँकी हुई हैं ऐसा माना जाय [ता उप्पत्ती विहला] तो उत्पत्ति कहना विफल है [पडिपिहिदे देवदत्तेव्व] जैसे देवदत्त कपड़े से ढंका हुआ था, कपड़े को हटा देने पर यह कहा जाय कि यह उत्पन्न हुआ ।
छाबडा