सव्वाणं पज्जयाणं अविज्जमाणाण होदि उप्पत्ती
कालाई-लद्धीए अणाइ-णिहणम्मि दव्वम्मि ॥244॥
अन्वयार्थ : [अणाइणिहणम्मि दव्वम्मि] अनादिनिधन द्रव्यों में [कालाईलद्वीए] कालादि लब्धि से [सव्वाण] सब [अविजमाणाण] अविद्यमान [पजयाणं] पर्यायों की [उत्पत्ती] उत्पत्ति [होदि] होती है ।

  छाबडा