
दव्वाण पज्जयाणं धम्म-विवक्खाए कीरए भेओ
वत्थु-सरूवेण पुणो ण हि भेदो सक्कदे काउं ॥245॥
अन्वयार्थ : [दवाणपज्जयाणं] द्रव्य और पर्यायों के [धम्मविवक्खाइ] धर्म-धर्मी की विवक्षा से [भेओ कीरए] भेद किया जाता है [वत्थुसरूवेण पुणो] वस्तुस्वरूप से [भेओ काऊं ण हि सक्कदे] भेद करने को समर्थ नहीं है ।
छाबडा