
जदि वत्थुदो विभेदो पज्जय-दव्वाण मण्णसे मूढ
तो णिरवेक्खा सिद्धी दोण्हं पि य पावदे णियमा ॥246॥
अन्वयार्थ : [मूढ] हे मूढ़ ! [जदि] यदि तू [पज्जयदव्वाण] द्रव्य और पर्याय के [वत्थुदो विभेदो] वस्तु से भी भेद [मण्णसे] मानता है [तो] तो [दोण्ह पि य] द्रव्य और पर्याय दोनों के [णिरवेक्खा सिद्धी] निरपेक्ष सिद्धी [णियमा] नियम से [पावदे] प्राप्त होती है ।
छाबडा