
घड-पड-जड-दव्वाणि हि णेय-सरूवाणि सुप्पसिद्धाणि
णाणं जाणेदि जदो अप्पादो भिण्ण-रूवाणि ॥248॥
अन्वयार्थ : [घड़पड़जड़दव्वाणि हि] घट-पट आदि समस्त जड़-द्रव्य [णेयसरूवाणि सुप्पसिद्धाणि] ज्ञेय-स्वरूप से भले-प्रकार प्रसिद्ध हैं [जदो गाणं जाणेदि] क्योंकि ज्ञान उसको जानता है [अप्पादो भिण्णरूवाणि] इसलिये वे आत्मा से भिन्नरूप रहते हैं ।
छाबडा