
अच्छीहि पिच्छमाणो जीवाजीवादि -बहु-विहं अत्थं
जो भणदि णत्थि किंचि वि सो झुट्ठाणं महा-झुट्ठो ॥250॥
अन्वयार्थ : [जीवाजीवादि बहुविहं अत्थं] जो नास्तिकवादी जीव-अजीव आदि बहुत प्रकार के पदार्थों को [अच्छीहिं पिच्छमाणो] प्रत्यक्ष नेत्रों से देखता हुआ भी [जो भणदि] जो कहता है कि [किंचि वि णत्थि] कुछ भी नहीं है [सो भुट्ठाणं महाझुट्ठो] वह असत्यवादियों में महा-असत्यवादी है ।
छाबडा