
णाणा-धम्म-जुदं पि य एयं धम्मं पि वुच्चदे अत्थं
तस्सेय -विवक्खादो णत्थि विवक्खा हु सेसाणं ॥264॥
अन्वयार्थ : [णाणधम्मजुदं पि य एयं धम्म पि वुच्चदे अत्थं] अनेक धर्मों से युक्त पदार्थ हैं तो भी एक धर्मरूप पदार्थ को कहता है [तस्सेयविवक्खादो हु सेसाणं विवक्खा णथि] क्योंकि जहाँ एक धर्म की विवक्षा करते हैं वहाँ उस ही धर्म को कहते हैं अवशेष सब धर्मों की विवक्षा नहीं करते हैं ।
छाबडा