सो चिय एक्को धम्मो वाचय-सद्दो वि तस्स धम्मस्स
जं जाणदि तं णाणं ते तिण्णि वि णय-विसेसा य ॥265॥
अन्वयार्थ : [सो चिय इक्को धम्मो] जो वस्तु का एक धर्म [तस्स धम्मस्स वाचयसद्दो वि] उस धर्म का वाचक शब्द [तं जाणदि तं गाणं] और उस धर्म को जाननेवाला ज्ञान [ते तिणि वि णयविसेसा य] ये तीनों ही नय के विशेष हैं ।

  छाबडा