+ द्रव्यार्थिक नय -
जो साहदि सामण्णं अविणा-भूदं विसेस-रूवेहिं
णाणा-जुत्ति-बलादो दव्वत्थो सो णओ होदि ॥269॥
अन्वयार्थ : [जो] जो नय वस्तु को [विसेसरूवेहिं] विशेषरूप से [अविणाभूदं] अविनाभूत [सामण्णं] सामान्य स्वरूप को [णाणाजत्तिवलादो] अनेक प्रकार की युक्ति के बलसे [साहदि] सिद्ध करता है [सो दव्वत्थो णओ होदि] वह द्रव्यार्थिक नय है ।

  छाबडा