+ पर्यायाथिक नय -
जो साहेदि विसेसे बहु-विह-सामण्ण-संजुदे सव्वे
साहण-लिंग-वसादो पज्जय- विसओ णओ होदि ॥270॥
अन्वयार्थ : [जो] जो नय [बहुविहसामण्ण संजदे सव्वे विसेसे] अनेक प्रकार सामान्य सहित सर्व विशेष को [साहणलिंगवसादो साहेदि] उनके साधन के लिंग के वश से सिद्ध करता है [पजयविसओ होदि] वह पर्यायाथिक नय है ।

  छाबडा