
जो साहेदि अदीदं वियप्प-रूवं भविस्समट्ठं च
संपडि-कालाविट्ठं सो हु णओ णेगमो णेओ ॥271॥
अन्वयार्थ : [जो] जो नय [अदीदं] अतीत [भविस्समट्ठच] भविष्यत [संपडिकालाविट्ठ] तथा वर्तमान को [वियप्परूवं साहदि] संकल्पमात्र सिद्ध करता है [सो हु णओणेगमो णेयो] वह नैगम नय है ।
छाबडा