
जीवो अणंत-कालं वसइ णिगोएसु आइ-परिहीणो
तत्तो णिस्सरिदूणं पुढवी-कायादिओ होदि ॥284॥
जीवो अणंत-कालं वसइ णिगोएसु आइ-परिहीणो
तत्तो णिस्सरिदूणं पुढवी-कायादिओ होदि ॥284॥
अन्वयार्थ : [जीवो आइपरिहीणो अणंतकालं णिगोएसु वसइ] यह जीव अनादिकाल से लेकर संसार में अनन्तकाल तक तो निगोद में रहता है [तत्वो णीस्सरिऊगं पुढेवीकायादिभो होदि] वहाँ से निकलकर पृथ्वीकायादिक पर्याय को धारण करता है ।
छाबडा