वियलिंदिएसु जायदि तत्थवि अच्छेदि पुव्व-कोडीओ
तत्तो णिस्सरिदूणं कहमवि पंचिंदिओ होदि ॥286॥
अन्वयार्थ : [वियलिंदिएसु जायदि] स्थावर से निकल कर त्रस होय तब बेइन्द्रिय, तेइन्द्रिय. चौइन्द्रिय शरीर पाता है [तत्थ वि पुव्वोकोडियो अच्छेदि] वहाँ भी कोटिपूर्व समय तक रहता है [तत्तो णीसरिदणं कहमवि पंचिंदिओ होदि] वहाँ से भी निकल कर पंचेन्द्रिय शरीर पाना बड़ा दुर्लभ है ।

  छाबडा