
सो तिव्व-असुह लेसो णरये णिवडेइ दुक्खदे भीमे
तत्थ वि दुक्खं भुंजदि सारीरं माणसं पउरं ॥288॥
अन्वयार्थ : [सो तिव्वअसुहलेसो दुक्खदे भीमे णरये णिवडेइ] वह क्रूर तिर्यंच तीव्र अशुभ परिणाम और अशुभ लेश्या सहित मरकर दुःखदायक भयानक नरक में गिरता है [तत्थ वि सारीरं माणसं पउरं दुक्खं भुजदि] वहाँ शरीर-सम्बन्धी तथा मन-सम्बन्धी प्रचुर दुःख भोगता है ।
छाबडा