तत्तो णिस्सरिदूणं पुणरवि तिरिएसु जायदे पावो
तत्थ वि दुक्खमणंतं विसहदि जीणो अणेयविहं ॥289॥
अन्वयार्थ : [तत्तो णीसरिदूणं पुणरवि तिरिएसु जायदे] उस नरक से निकलकर फिर भी तिर्यंचगति में उत्पन्न होता है [तत्थ वि पावो जीवो अणेयविहं अणंतं दुक्खं विसहदि] वहाँ भी पापरूप जैसे हो वैसे यह जीव अनेक प्रकार का अनन्त दुःख विशेषरूप से सहता है ।

  छाबडा