
अह णीरोओ होदि हु तह वि ण पावेदि जीवियं सुइरं
अह चिर-कालं जीवदि तो सीलं णेव पावेदि ॥293॥
अन्वयार्थ : [अह णीरोओ होदि हु] यदि निरोग भी हो जाय [तह वि सहरं जीवियं ण पावेइ] तो दीर्घ जीवन नहीं पाता है, इसका पाना दुर्लभ है [अह चिरकालं जीवदि] यदि चिरकाल तक जीता है [तो सीलं णेव पावेइ] तो शील नहीं पाता है क्योंकि उत्तम स्वभाव पाना दुर्लभ है ।
छाबडा