मणुव-गईए वि तओ मणुव-गईए महव्वदं सयलं
मणुव-गदीए झाणं मणुव-गदीए वि णिव्वाणं ॥299॥
अन्वयार्थ : [मणुवगईए वि तओ] हे भव्य जीवों ! इस मनुष्यगति में ही तप का आचरण होता है [मणुवुगईए सयलं महव्वदं] इस मनुष्य गति में ही समस्त महाव्रत होते हैं [मणुवगईए झाणं] इस मनुष्यगति में ही धर्म-शुक्ल ध्यान होते हैं [मणुवगईए वि णिवाणं] और इस मनुष्यगति में ही निर्वाण (मोक्ष) की प्राप्ति होती है ।

  छाबडा