
तेणुवइट्ठो धम्मो संगासत्ताण तह असंगाणं
पढमो बारह-भेओ दह-भेओ भासिओ बिदिओ ॥304॥
अन्वयार्थ : [तेणुवइट्ठो धम्मो] उस सर्वज्ञ के द्वारा उपदेश किया हुआ धर्म दो प्रकार का है [संगासत्ताण तह असगाणं] संगासक्त का और असंग का [पढमो बारहमेमो] पहिला गृहस्थ का धर्म तो बारह भेदरूप है [विदिभो दसभेओ] दूसरा मुनि का धर्म दस भेदरूप है ।
छाबडा