
सम्मद्दंसण-सुद्धो रहिओ मज्जाइ-थूल-दोसेहिं
वय-धारी सामाइउ पव्व-वई पासुयाहारी ॥305॥
राई-भोयण विरओ मेहुण-सारंभ-संग-चत्तो य
क ज्जाणुमोय-विरओ उद्दिट्ठाहार-विरदो य ॥306॥
अन्वयार्थ : [सम्मदंसणसुद्धो मजाइलदोसेहिं रहिओ] 1 शुद्ध सम्यग्दृष्टि, 2 मद्य आदि स्थूल दोषों से रहित दर्शन प्रतिमा का धारी [वयधारी] 3 व्रतधारी [सामइउ] 4 सामायिक प्रतिमा [पावई] 5 पर्ववती [पासुयाहारी] 6 प्रासुकाहारी [राईभोयणविरओ] 7 रात्रि-भोजन-त्यागी [मेहुणसारंभसंगचत्तो य] 8 मैथुन-त्यागी 6 आरम्भ-त्यागी 10 परिग्रह-त्यागी [कजाणुमोयविरदो] 11 कार्यानुमोदविरत [उद्दिवाहारविरदो य] और 12 उद्दिष्टाहारविरत इसप्रकार श्रावक-धर्म के 12 भेद हैं।
छाबडा