
अणउदयादो छण्हं सजाइ-रूवेण उदयमाणाणं
सम्मत्त-कम्म-उदये खयउवसमियं हवे सम्मं ॥309॥
अन्वयार्थ : [अणउदयादो छण्ह] पूर्वोक्त सात प्रकृतियों में से छह प्रकृतियों का उदय न हो [सजाइरूवेण उदयमाणाणं] सजाति प्रकृति से उदयरूप हो [सम्मत्तकम्मउदए] सम्यक् कर्मप्रकृति का उदय होने पर [खयउवसमियं सम्म हवे] क्षायोपशमिक सम्यक्त्व होता है ।
छाबडा