
भत्तीए पुज्जमाणो विंतर-देवो वि देदि जदि लच्छी
तो किं धम्में कीरदि एवं चिंतेइ सद्दिट्ठी ॥320॥
अन्वयार्थ : [सदिट्ठी एवं चिंतेइ] सम्यग्दृष्टि ऐसा विचार करता है कि [जदि भत्तीए पुञ्जमाणो विंतरदेवो वि लच्छी देदि] यदि भक्ति से पूजा हुआ व्यन्तर देव हो लक्ष्मी को देता है [तो धम्म किं कीरदि] तो धर्म क्या करता है ?
छाबडा