
जं जस्स जम्मि देसे जेण विहाणेण जम्मि कालम्मि
णादं जिणेण णियदं जम्मं वा अहव मरणं वा ॥321॥
तं तस्स तम्मि देसे तेण विहाणेण तम्मि कालम्मि
को सक्कदि वारेदुं इंदो वा तह जिणिंदो वा ॥322॥
अन्वयार्थ : [जं जस्स जम्मिदेसे] जो जिस जीव के जिस देश में [जम्मि कालम्मि] जिस काल में [जेण विहाणेण] जिस विधान से [जम्मं वा अहव मरणं वा] जन्म तथा मरण [जिणेण] सर्वज्ञ-देव के द्वारा [णादं] जाना गया है [णियदं] वह नियम से [तं तस्स तम्मि देसे] उस प्राणी के वह ही उस ही देश में [तम्मि कालम्मि] उस ही काल में [तेण विहाणेण] उस ही विधान से नियम से होता है [इदो वा तह जिणिंदो वा को वारेदुं सक्कदि] उसका इन्द्र, जिनेन्द्र, तीर्थंकर देव कोई भी निवारण नहीं कर सकते ।
छाबडा