
जो वावरेइ सदओ अप्पाण-समं परं पि मण्णंतो
णिंदण-गरहण-जुत्तो परिहरमाणो महारंभे ॥332॥
अन्वयार्थ : [जो सदओ वावरइ] जो दयासहित तो व्यापार कार्य में प्रवृत्ति करता है [अप्पाणसमं परं पि मण्णतो] सब प्राणियों को अपने समान मानता है [निंदणगर हणजुत्तो] निंदा और गर्हा सहित है [महारंभे परिहरमाणो] जिनमें त्रस हिंसा बहुत होती हो ऐसे बड़े व्यापार आदि के कार्य महारम्भों को छोड़ता हुआ प्रवृत्ति करता है ।
छाबडा