जो उवएसो दिज्जदि किसि-पसु-पालण-वणिज्ज-पमुहेसु
पुरसित्थी -संजोए अणत्थ-दंडो हवे विदिओ ॥345॥
अन्वयार्थ : [जो किसिपसुपालणवणिज्जपमुहेसु] खेती, पशुओं का पालन, वाणिज्य इत्यादि पाप-सहित कार्य तथा [पुरिसित्थीसंजोए] पुरुष-स्त्री का संयोग जैसे हो वैसे करने आदि कार्यों का [उवएसो दिजइ] दूसरों को उपदेश देना (इनका विधान बताना जिनमें अपना प्रयोजन कुछ सिद्ध नहीं होता हो केवल पाप ही उत्पन्न होता हो) [विदिओ अणत्थदडो हवे] सो दूसरा (पापोपदेश नाम का) अर्नथदण्ड है ।

  छाबडा