
विहलो जो वावारो पुढवी-तोयाण अग्गि-वाऊणं
तह वि वणप्फदि-छेदो अणत्थ-दंडो हवे तिदिओ ॥346॥
अन्वयार्थ : [जो पुढवीतोयाण अग्गिवाऊणं विहलो वावारो] जो पृथ्वी, जल, अग्नि, पवन इनके व्यापार में विफल प्रवृत्ति करना [तह वि वणप्फदिछेदो] तथा बिना प्रयोजन वनस्पति का छेदन-भेदन करना [तिदिओ अणत्थदंडो हवे] सो तीसरा प्रमादचरित नामक अनर्थदण्ड है ।
छाबडा