
मज्जार-पहुदि-धरणं आउह -लोहादि-विक्कणं जं च
लक्खा -खलादि-गहणं अणत्थ-दंडो हवे तुरिओ ॥347॥
अन्वयार्थ : [मज्जारपहुदिधरणं] जो बिलाव आदि हिंसक जीवों का पालना [आयुहलोहादि विकणं जं च] लोहे का तथा लोहे आदि के आयुधों का व्यापार करना देना लेना [लक्खाखलादिगहणं] लाख, खल आदि शब्द से विष वस्तु, आदि का देना-लेना व्यापार करना [तुरिओ अणत्थदंडो हवे] चौथा हिंसादान नामक अनर्थदण्ड है ।
छाबडा