सामाइयस्स करणे खेत्तं कालं च आसणं विलओ
मण-वयण-काय-सुद्धी णायव्वा हुंति सत्तेव ॥352॥
अन्वयार्थ : [सामाइयस्स करणं] प्रथम ही सामायिक के करने में [खेतं कालं च आसणं विलओ] क्षेत्र, काल, आसन और लय [मणवयणकायसुद्धी] मन-वचन-काय की शुद्धता [सत्तेव गायव्वा हुति] ये सात सामग्री जानने योग्य है ।

  छाबडा