
बारस-वएहिं जुत्तो संलेहणं जो कुणेदि उवसंतो
सो सुर-सोक्खं पाविय कमेण सोक्खं परं लहदि ॥369॥
अन्वयार्थ : [जो] जो श्रावक [वारसवएहिं जुत्तो] बारह व्रत सहित [उवसंतो संलेहणं करेदि] अन्त समय में उपशम भावों से युक्त होकर सल्लेखना करता है [सो सुरसोक्खं पाविय] वह स्वर्ग के सुख पाकर [कमेण परं सोक्खं लहदि] अनुक्रम से उत्कृष्ट सुख को पाता है ।
छाबडा